आज अच्छे काम के लिए लोग नही पहचाने जाते , लोग बुरे काम मेंजल्दी जाने जाते है । आज यदि मैं सत्यनारायण की कथा कराता हूँ और पंडित जी शंख बजाते है तो उसकी आवाज दूर तक नही जाती है , परन्तु यदि मेरे घर के बाहर हिजडे ढोलक बजाते है तो पूरा मोहल्ला सुन लेगा । लोगों को हर और अपना ही मतलब दिखाई देता है । वे केवल अपने मतलब की बात सुनते और देखते है । उन्हें केवल वह दिखता है जो वे देखना चाहते है , वे केवल वह देखते है जो उन्हें लाभ देता है ।
न्यूज़ चैनल को अपने टी आर पी की चिंता है , कोई मरे या जिए । पहले कभी न्यूज़ पेपर या न्यूज़ चैनल पर खबरे मानवीयता के आधार पर आती थी , लेकिन हर चीज का व्यवसायीकरण ऐसा जहर है जिसने इंसानियत ख़त्म कर दी है , लोग बमों से घायल और मरते हुआ लोगों को देख कर उफ़ करते है और आगे का चेंनेल बदल देते है । चैनल वाले मारे गए परिवार वालो से पूछते है आपको कैसा लग रहा है ? अगला सवाल घायल व्यक्ति से पूछते है - आप अब क्या करेंगे ? अरे भाई जो परिवार इस हादसे का शिकार है उसे इतनी फुर्सत है की वो अपने घायल या मृत को देखे या तुम्हारी बात सुने ।
इश्मित सिंह के परिवार पर मुसीबत आ पड़ी है और चैनल वाले इसे ब्रेकिंग न्यूज़ और सबसे तेज न्यूज़ बता कर अपना टी आर पी बढ़ा रहे है ।
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