Friday, August 1, 2008

मेरी बात

आज कल लोगो की जान बहुत सस्ती हो रही है । सड़क दुर्घटना ऐसी हो रही है की सफर करते डर लग रहा है। ख़ास तौर पर पहाडो पर तो लोग हर रोज जान हथेली पर रख कर यात्रा कर रहे है । कोई दिन जाता होगा जब कोई दुर्घटना नही होती ।क्या ये सब प्राकृतिक है , या भगवान ये सब कर रहा है ?

भगवान् कभी अपने ऊपर दोष नही लगने देता है । हमेशा व्यक्ति अपने ही दोष से परेशान होता है । पहाडो पर लोग हों या प्लेन में ड्राइवर शराब बहुत पीते है , और शराब और लापरवाही दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण है।

कुछ दोष सड़कों का भी है , सड़कें अच्छी नही है । ट्रेफिक पर कोई कंट्रोल नही है । लोग बिना अच्छी ड्राइविंग और ट्रेनिग लिए बिना ही वाहन चलाने लगते है ।

आज अच्छे ट्रेंड ड्राईवर की जरुरत है जो इन सड़कों पर लोगो को सुरक्षित उनकी मंजिल तक पहुँचा सके।

हम आज पश्चिमी देशों की तारीफ़ करते है की वहां ये होता है - वहाँ वह होता है । पर कोई इस बात को नही देखता की वहाँ पर लोग क़ानून का सम्मान करते है , चाहे छोटा आदमी हो या बड़ा । सभी नियम और क़ानून का पालन करते है । अक्सर मेरे अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लोग जो मेरे मित्र है , उनसे मेरी चर्चा इस विषय पर होती है । वे मुझे हैरान कर देते है की वहाँ पर बिना हेलमेट और बिना ड्राइविंग लाइसेंस के कोई दोपहिया वाहन नही चलाता है , और अपने देश में लोग इस क़ानून को बोझ समझते है ।

Thursday, July 31, 2008

मेरी बात

लोग कहते है की एक मछली सारे तालाब को गन्दा कर देती है .इसका मतलब है कि तालाब का पानी किसी काम का नही रह गया है . क्या यह किसी दूसरे काम नही आ सकता . या फिर ऐसा करा जाए की तालाब से उस मछली को निकाल कर बाहर फ़ेंक दो , और तालाब में लाल दवा दाल दो और कुछ नया और ताजा पानी दाल दो , कुछ ना कुछ सुधार आ ही जाएगा . ये नही की तालाब की और देखना ही छोड़ दो.समाज का हाल भी तालाब जैसा है.


बहुत वर्षों पहले छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसी नुस्खे से जल दस्यु की टोली को जल सेना विभाग देकर अपनी जल सीमा सुरक्षित कर ली थी .

Tuesday, July 29, 2008

आज अच्छे काम के लिए लोग नही पहचाने जाते , लोग बुरे काम मेंजल्दी जाने जाते है । आज यदि मैं सत्यनारायण की कथा कराता हूँ और पंडित जी शंख बजाते है तो उसकी आवाज दूर तक नही जाती है , परन्तु यदि मेरे घर के बाहर हिजडे ढोलक बजाते है तो पूरा मोहल्ला सुन लेगा । लोगों को हर और अपना ही मतलब दिखाई देता है । वे केवल अपने मतलब की बात सुनते और देखते है । उन्हें केवल वह दिखता है जो वे देखना चाहते है , वे केवल वह देखते है जो उन्हें लाभ देता है ।

न्यूज़ चैनल को अपने टी आर पी की चिंता है , कोई मरे या जिए । पहले कभी न्यूज़ पेपर या न्यूज़ चैनल पर खबरे मानवीयता के आधार पर आती थी , लेकिन हर चीज का व्यवसायीकरण ऐसा जहर है जिसने इंसानियत ख़त्म कर दी है , लोग बमों से घायल और मरते हुआ लोगों को देख कर उफ़ करते है और आगे का चेंनेल बदल देते है । चैनल वाले मारे गए परिवार वालो से पूछते है आपको कैसा लग रहा है ? अगला सवाल घायल व्यक्ति से पूछते है - आप अब क्या करेंगे ? अरे भाई जो परिवार इस हादसे का शिकार है उसे इतनी फुर्सत है की वो अपने घायल या मृत को देखे या तुम्हारी बात सुने ।

इश्मित सिंह के परिवार पर मुसीबत आ पड़ी है और चैनल वाले इसे ब्रेकिंग न्यूज़ और सबसे तेज न्यूज़ बता कर अपना टी आर पी बढ़ा रहे है ।

Monday, July 28, 2008

लोगो को क्या हो रहा है ?

आज जब हम चारो और देखते है तो हर और लोग एक दूसरे को अजीब तरह से देखते है । हर और अशांति और डर का माहोल है । लोग हर अजनबी को आतंकवादी और वहसी दरिंदा समज रहे है। हम कैसा समाज बना रहे है।
जब देश आजाद हुआ था तब महात्मा गाँधी और पंडित नेहरु ने क्या सोचा था - क्या इसी समाज के लिए आजादी की जंग हुई थी ? यदि आज ये लोग जिन्दा होते तो क्या सोचते ?आज लडाई आम आदमी और ख़ास आदमी की है.

खास लोग अपराध नही , अपराधी की जात पूछ रहे है . अगर वह दूसरी जाती का है या दूसरे धरम का है तो धर्म युद्ध का मूड बने.यदि किसी दल का है तो चुनावी तयारी करते हुए सड़क घेरें . कुछ सियासी लोग ही कहते है अपराध मैं सियासत हो रही है. कुछ मामला दर्ज होते ही पुलिस की गर्दन लपकने दौडते है.पुलिसवाले पसीना पोछ्ते हुए इन नेताओं के चेहेरे देखतेहै और उनकी न्युसेन्स को तोलते है . आम लोग गम पी लेते है . उत्तरकाशी की उस लड़की की तरह जिसे बलात्कार के बाद गंगा मैं फ़ेंक दिया था. दरअसल ख़ास लोग बहुत हो गए है . ऐसे मैं पुलिश वाले आम आदमी के लिए समय निकले भी तो कैसे. लोग आज भी खुले मैं सब कुछ खेल रहे है । पहले जिस काम को सबसे छिपा कर किया जाता था , आज वह सबके सामने बड़ी शान से किया जाता है । क्योंकि उन्हें अपना सरपरस्त दिखता है , पहले लोग भगवान से डरते थे आज लोग उस से डरते है जिसका कोई गोडफादर होता है।

Saturday, June 21, 2008

Child Psychology







The children from around the world are same . When we looks around , we can introduce every where a smile on every innocent face . They think and feel same to same in U.S. , Russia , China,


Japan and as well in India . Here are some pictures , who tells us a new story.




In my view , when we looks on a face , from any place , we can find a cute smile on their cheeks . Can you feel and enjoy the feelings from the side of a child ? Every time when we looks in the eyes of a child we can feel a lovely smile of God creation . Please looks in the eyes of this child , how you feel ? Is it not a magician ?Many and many sentences can be write on his eye, cheeks, lips and smile ..........