Thursday, July 31, 2008
मेरी बात
बहुत वर्षों पहले छत्रपति शिवाजी महाराज ने इसी नुस्खे से जल दस्यु की टोली को जल सेना विभाग देकर अपनी जल सीमा सुरक्षित कर ली थी .
Tuesday, July 29, 2008
आज अच्छे काम के लिए लोग नही पहचाने जाते , लोग बुरे काम मेंजल्दी जाने जाते है । आज यदि मैं सत्यनारायण की कथा कराता हूँ और पंडित जी शंख बजाते है तो उसकी आवाज दूर तक नही जाती है , परन्तु यदि मेरे घर के बाहर हिजडे ढोलक बजाते है तो पूरा मोहल्ला सुन लेगा । लोगों को हर और अपना ही मतलब दिखाई देता है । वे केवल अपने मतलब की बात सुनते और देखते है । उन्हें केवल वह दिखता है जो वे देखना चाहते है , वे केवल वह देखते है जो उन्हें लाभ देता है ।
न्यूज़ चैनल को अपने टी आर पी की चिंता है , कोई मरे या जिए । पहले कभी न्यूज़ पेपर या न्यूज़ चैनल पर खबरे मानवीयता के आधार पर आती थी , लेकिन हर चीज का व्यवसायीकरण ऐसा जहर है जिसने इंसानियत ख़त्म कर दी है , लोग बमों से घायल और मरते हुआ लोगों को देख कर उफ़ करते है और आगे का चेंनेल बदल देते है । चैनल वाले मारे गए परिवार वालो से पूछते है आपको कैसा लग रहा है ? अगला सवाल घायल व्यक्ति से पूछते है - आप अब क्या करेंगे ? अरे भाई जो परिवार इस हादसे का शिकार है उसे इतनी फुर्सत है की वो अपने घायल या मृत को देखे या तुम्हारी बात सुने ।
इश्मित सिंह के परिवार पर मुसीबत आ पड़ी है और चैनल वाले इसे ब्रेकिंग न्यूज़ और सबसे तेज न्यूज़ बता कर अपना टी आर पी बढ़ा रहे है ।
Monday, July 28, 2008
लोगो को क्या हो रहा है ?
जब देश आजाद हुआ था तब महात्मा गाँधी और पंडित नेहरु ने क्या सोचा था - क्या इसी समाज के लिए आजादी की जंग हुई थी ? यदि आज ये लोग जिन्दा होते तो क्या सोचते ?आज लडाई आम आदमी और ख़ास आदमी की है.
खास लोग अपराध नही , अपराधी की जात पूछ रहे है . अगर वह दूसरी जाती का है या दूसरे धरम का है तो धर्म युद्ध का मूड बने.यदि किसी दल का है तो चुनावी तयारी करते हुए सड़क घेरें . कुछ सियासी लोग ही कहते है अपराध मैं सियासत हो रही है. कुछ मामला दर्ज होते ही पुलिस की गर्दन लपकने दौडते है.पुलिसवाले पसीना पोछ्ते हुए इन नेताओं के चेहेरे देखतेहै और उनकी न्युसेन्स को तोलते है . आम लोग गम पी लेते है . उत्तरकाशी की उस लड़की की तरह जिसे बलात्कार के बाद गंगा मैं फ़ेंक दिया था. दरअसल ख़ास लोग बहुत हो गए है . ऐसे मैं पुलिश वाले आम आदमी के लिए समय निकले भी तो कैसे. लोग आज भी खुले मैं सब कुछ खेल रहे है । पहले जिस काम को सबसे छिपा कर किया जाता था , आज वह सबके सामने बड़ी शान से किया जाता है । क्योंकि उन्हें अपना सरपरस्त दिखता है , पहले लोग भगवान से डरते थे आज लोग उस से डरते है जिसका कोई गोडफादर होता है।